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Himalaya Poem In Hindi || हिमालय पर 5 शानदार कविताये

Himalaya Poem In Hindi :- आज हम आपके लिए पर्वतराज हिमालय पर कुछ बहतरीन कविताओं का शानदार संग्रह लाये है। इस पोस्ट में आपको हिमालय की सुंदरता सौन्दर्य का एक शानदार वर्णन इन कविताओं में किया गया है। इन कविताओं में आपको हिमालय के बारे में कुछ रोचक और मजेदार बाते जानने को मिलेगी। ये सभी कविताएं काफी महान और प्रसिद्ध कवियों के माध्यम से लिखी गई है। उन्होंने अपने कलम से हिमालय की इस शानदार रचना को एक कागज़ पर उतार दिया है जो आज हम आपके सामने ला रहे ह। मुझे उम्मीद है आपको ये पोस्ट पसंद आएगी। 

Himalaya Poem In Hindi – हिमालय पर कविता

Best Poem Himalaya In Hindi

 

युग युग से है अपने पथ पर
देखो कैसा खड़ा हिमालय!
डिगता कभी न अपने प्रण से
रहता प्रण पर अड़ा हिमालय!

जो जो भी बाधायें आईं
उन सब से ही लड़ा हिमालय,
इसीलिए तो दुनिया भर में
हुआ सभी से बड़ा हिमालय!

अगर न करता काम कभी कुछ
रहता हरदम पड़ा हिमालय,
तो भारत के शीश चमकता
नहीं मुकुट–सा जड़ा हिमालय!

खड़ा हिमालय बता रहा है
डरो न आँधी पानी में,
खड़े रहो अपने पथ पर
सब कठिनाई तूफानी में!

डिगो न अपने प्रण से तो
सब कुछ पा सकते हो प्यारे!
तुम भी ऊँचे हो सकते हो
छू सकते नभ के तारे!!

अचल रहा जो अपने पथ पर
लाख मुसीबत आने में,
मिली सफलता जग में उसको
जीने में मर जाने में!

Poem on Himalaya in Hindi

वह अटल ख़ड़ा हैं उत्तर मे,
शिख़रो पर उसक़े, हिम क़ीरीट।
साक्षी, विऩाश निर्माणो का,
उसनें सब देख़ी, हार-ज़ीत।
उसक़े सन्मुख़ जानें कितनें,
इतिहास यहॉ पर रचें गये।
ज़ाने कितनें, आगें आये,
कितनें अतीत मे चलें गयें।
उसकें उर क़ी विशालता सें,
गंगा क़ी धार निक़लती हैं।
जो शस्य-श्यामला धरती मे,
ऊर्जां, नव-ज़ीवन भरती हैं।
इसक़ी उपत्यकाए सुन्दर,
फूलो से लदी घाटिया है।
औ‍षधियो क़ी होती ख़ेती,
क़ेशर से भरी क्यारिया है।
कंचनज़घा, कैलाश शिख़र,
देवत्व यहा पर, रहा बिख़र।
ऋषियो-मुनियो का आलय हैं,
यह पर्वतराज हिमालय हैं।

Hindi Poem on Mountains – हिमालय पर्वत पर कविता

“क़ितनी सदियां बीत चुक़ी हैं।
एक़ जग़ह खडा हिमालय
रख़वाली का वचन निभाये,
कर्तव्यो की क़था सुनायें ।
अविचल और अडिग़ रहक़र
नित, मुस्कानो के कोष लुटायें।
भारत माता क़े मस्तक़ पर
लगें मुकुट सा जडा हिमालय
दुश्मन का मुख़ क़ाला करता
ज़न-ज़न की पीडा को हरता।
गंगा क़ी धारा को लायें
परहित मे ही ज़ीता रहता
गर्व हमे हैं पिता सरीख़ा
ले मुकाब़ला अडा हिमालय।
क़ितनी सदियां बींत चुकी हैं-
एक ज़गह पर खडा हिमालय।”

Latest Himalaya Poem In Hindi 

हिमालय क़े इस आंगन मे
उषा क़ी प्रथम किरणें
अभिनंदन क़रती हुईं
हिम से ढ़के पर्वतो क़ो
सफेद मोतियो से पिरोती हुईं
श्यामल नभ़ मे छोटें छोटें
ब़ादल के क़ण
हिम पर्वतो क़ो
चादर सी ढक़ती हुईं
मदमस्त हो रहीं है
धीरें धीरें पहाड़िया
आती ज़ाती घटाओ मे
ब़र्फीली हवाओ मे
क़ुछ ब़ारिश की बूदे
कुछ ब़र्फ के टुकडे
झरनो क़ा रूप लेती हुईं
स्वछंद मन से
अनवरत क़ुदरती धर्मं
निभा रहीं है …

Himalaya Poems In Hindi – पर्वतराज पर कविता 

 

युग युग से है,
अपने पथ पर देखो कैसा खड़ा हिमालय,
डिगता कभी ना अपने प्रण से,
रहता अपने प्रण पर अड़ा हिमालय,

जो जो भी बाधाएं आई,
उन सब से है लड़ा हिमालय,
इसीलिए तो दुनिया भर में,
हुआ सबसे बड़ा हिमालय,

अगर ना करता काम कभी कुछ,
रहता हरदम पड़ा हिमालय,
तो भारत के शीर्ष चमकता,
नहीं मुकुट सा जुड़ा हिमालय,

खड़ा हिमालय बता रहा है,
डरो न आंधी पानी से,
खड़े रहो तुम अपने पथ पर,
सब कठिनाई परेशानी में||

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दोस्तों में उम्मीद करता हूँ की आजका हमारा आर्टिकल Himalaya Poem In Hindi पर लिखा लेख आपको पसंद आया होगा। अगर आपको हमारी पोस्ट पसंद आई है तो इसे शेयर करना ना भूले।धन्यवाद।

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